बाल कहानी – अच्छे व्यवहार की जीत
रवि एक अच्छा लड़का है। वह कभी लड़ाई झगड़ा नहीं करता है। दया का गुण भी है। संस्कारी है। कभी अपने माता-पिता को गाली नही दिया। स्कूल में गुरूजनों के प्रति आदर भाव रखता है। पढ़ने में भी ठीक है। इस तरह से वह एक लोकप्रिय लड़का बन गया है।
उसके मधुर व्यवहार से मोहल्ले के लोग भी उसको खूब चाहते हैं। लेकिन मोहल्ले के कुछ शरारती लड़के उससे जलते हैं। कभी-कभी उसको गाली भी दे देते थे। उसको रास्ते में तंग भी करते थे लेकिन रवि उनसे लड़ता नहीं था बल्कि उनको समझाने का प्रयास करता था।
उसका कहना था कोई चीज तुम मुझे दे रहे हो अगर मैं नहीं लूंगा तो वह आपके पास ही रहेगी, इसी तरह अगर गाली तुम दोगे, मैं ंतुम्हारी गाली नही लूंगा तो गाली तुम्हारे ही पास रहेगी। कुछ लड़के उसकी भावना समझ गये और उसके दोस्त भी बन गये।
एक बार एक लड़के ने उसकी किताब फाड़ दी लेकिन विनम्र स्वभाव का लड़का रवि ने कुछ नहीं कहा और बिना कुछ बोले सरलता का परिचय दिया। रवि के कुछ न कहने पर वह लड़का खुद शर्मिंदगी महसूस किया।
अगले दिन जब रवि स्कूल आया तो वह लड़का रवि से माफी मांगा और कहा कि अब दुबारा ऐसी गलती नही करूँगा। रवि के अच्छे व्यवहार, सरलता एवं उदारता को देखकर स्वयं कुछ लड़कों को अपनी गलती का एहसास हुआ।
— जयचन्द प्रजापति ‘जय’
