कविता
सुबह की रोशनी बिखरी है चारों ओर,
तारों की महफ़िल अब ढलने लगी है।
उठो ऐ मेरे प्यारे दोस्तों,
ज़िंदगी की नई सुबह चलने लगी है।
हर दिन एक नई उम्मीद लेकर आता है,
हर सवेरा खुशियों का पैगाम लाता है।
सफलता चूमे कदम तुम्हारे हर मोड़ पर,
यह दिल हमेशा यही दुआ दोहराता है।
मुस्कुराकर स्वागत करो इस नए दिन का,
हर सपना तुम्हारा सच हो जाए।
दोस्ती का यह प्यारा सा बंधन,
यूँ ही उम्र भर खुशबू फैलाए।
आप सभी का दिन मंगलमय और खुशियों से भरा हो!
— हेमन्त सिंह कुशवाह
