कविता

कविता

​सुबह की रोशनी बिखरी है चारों ओर,
तारों की महफ़िल अब ढलने लगी है।
उठो ऐ मेरे प्यारे दोस्तों,
ज़िंदगी की नई सुबह चलने लगी है।
​हर दिन एक नई उम्मीद लेकर आता है,
हर सवेरा खुशियों का पैगाम लाता है।
सफलता चूमे कदम तुम्हारे हर मोड़ पर,
यह दिल हमेशा यही दुआ दोहराता है।
​मुस्कुराकर स्वागत करो इस नए दिन का,
हर सपना तुम्हारा सच हो जाए।
दोस्ती का यह प्यारा सा बंधन,
यूँ ही उम्र भर खुशबू फैलाए।
​आप सभी का दिन मंगलमय और खुशियों से भरा हो!
— हेमन्त सिंह कुशवाह

हेमंत सिंह कुशवाह

राज्य प्रभारी मध्यप्रदेश विकलांग बल मोबा. 9074481685

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