सलाहकार हो बुरे, करते कुल-विनाश
मात्र महाभारत नहीं, युद्धों का इतिहास।
सलाहकार हो बुरे, करते कुल-विनाश॥
कर्ण-शकुनि की चाल ने, बढ़ाया मन में द्वेष।
दुर्योधन के हठ तले, जलता रहा परिवेश॥
नीति-विहीन सलाह जब, देती मन को मान।
सत्ता, वैभव, स्वार्थ में, खोता कुल-सम्मान॥
रामायण केवल नहीं, कथा पुरानी आज।
मर्यादा के पथ चलो, यही जीवन का राज॥
रावण था विद्वान पर, छोड़ी सच की राह।
अहंकार के सामने, मिट गई सभी चाह॥
बात विभीषण की मोड़, रावण चुनता पाश।
हित वचनों को छोड़कर, स्वयं बुलाय विनाश॥
जो हित की बात कहे, उसका रख लो मान।
मीठे झूठे बोल से, दूर रहो दो ध्यान॥
संगत जैसी हो मनुज, वैसा बने विचार।
अच्छी सलाह सँवारती, बुरी करे संहार॥
सीख महाभारत यही, मत सुनना हर बात।
रामायण कहती यही, नीति रहे दिन-रात॥
ज्ञान तभी सार्थक बने, निर्मल रखे विचार।
मर्यादा और नीति से, सुंदर हो संसार॥
— डॉ. सत्यवान सौरभ
