।।श्री कृष्ण जन्माष्टमी।।
सम्पूर्ण ब्रज में छा रहा मंगल अपार
आया रे आया जन्माष्टमी त्यौहार।
देवकीनंदन श्री वसुदेव दुलारे
जन्म से ही रहे उनके करतब न्यारे
टूटे जेल के ताले, सोए पहरेदार
आया रे आया जन्माष्टमी त्यौहार।
था अष्टमी का दिन व अंधियारी रात
गहरी जमुना और झमाझम बरसात
छूकर पग जमुना जी हुई निहाल
आया रे आया जन्माष्टमी त्यौहार।
पहुंचाया प्रभु को नन्द जी के द्वारे
गोकुल में खूब बजे ढोल एवं नगाड़े
कान्हा जी की महिमा है अपरम्पार
आया रे आया जन्माष्टमी त्यौहार।
शिशु काल राक्षसी पूतना को मारा
बाल अवस्था में कंस को संहारा
इन्द्र का घमंड कर दिया तार-तार
आया रे आया जन्माष्टमी त्यौहार।
ग्वाल-बाल संग मिल हल्ला मचाया
बांसुरी की तान पर सबको नचाया
माखन चुराया, खाई मैया की मार
आया रे आया जन्माष्टमी त्यौहार।
बाल लीलाएं एक से एक बढ़कर
खेले वह कालिया नाग पे चढ़कर
देखते ही देखते उसे दिया पछाड़
आया रे आया जन्माष्टमी त्यौहार।
मित्रता का फर्ज भी बखूबी निभाया
अर्जुन को गीता का ज्ञान सुनाया
महाभारत युद्ध के थे अहम किरदार
आया रे आया जन्माष्टमी त्यौहार।
घर-घर सजी है कन्हैया की झांकी
कोई कोर कसर न रह जाए बाकी
कर रहे प्रभु जी का अनुपम श्रंगार
आया रे आया जन्माष्टमी त्यौहार।
आधी रात को श्री कृष्ण जी आएंगे
माखन मिश्री का भोग लगाएंगे
सारे जगत के हैं वह पालनहार
आया रे आया जन्माष्टमी त्यौहार।
अधरों पे प्रभु के है मुस्कान भारी
दर्शन को व्याकुल हैं सब नर-नारी
सबकी लगा देंगे वह नैया पार
आया रे आया जन्माष्टमी त्यौहार।
श्री कृष्ण तो हैं भारत की आत्मा
आत्मा ही क्या, हैं साक्षात परमात्मा
सम्पूर्ण सृष्टि के हैं वह सृजनहार
आया रे आया जन्माष्टमी त्यौहार।
सम्पूर्ण ब्रज में छा रहा मंगल अपार
आया रे आया जन्माष्टमी त्यौहार।।
— नवल अग्रवाल
