हे गोबिन्द हे गोपाल
हे गोबिन्द हे गोपाल
हे गोबिन्द हे गोपाल
अनादि अनंत अति विशाल,
इस जगत के कर्ण धार,
प्रभु सुन लो भक्त की पुकार
ह्रदय से करलो स्वीकार ,
मेरे कष्ट और विकार-
कर के दूर करो उद्धार ,
सृष्टि के प्रभु महा काल,
हे गोबिन्द हे गोपाल
हे गोबिन्द हे गोपाल
सुनीति और शुभ संस्कार
अब प्रभु करो जग में प्रचार ,
दूर कर के अहंकार ,
मिटा दो सारा अंधकार
धरम भक्ति के तुम कृपाल,
गो माता के रक्षक गोपाल .
हे गोबिन्द हे गोपाल
हे गोबिन्द हे गोपाल
ज्ञान का फैले प्रकाश,
पापियों का हो विनाश ,
मैं शरण आया अनाथ,
प्रभु भक्ति बिन कुछभी न पास,
दुखियों के तुम दीनदयाल
हे गोबिन्द हे गोपाल
हे गोबिन्द हे गोपाल
— जय प्रकाश भाटिया
