कविता

कृष्णाष्टमी

भादो की तिथि अष्टमी, प्रकट हुए गोपाल।
जन मन हर्षित देखकर, गोद नंद के लाल।।

मोहन तू ही आत्मधन,प्रभु तू ही मनमीत ।
कृष्ण तुझी में डूबकर,मीरा गाये गीत ।।

मनभावन मुख सांवरा, चंचल तेरे नैन।
सोच सोचकर मैं तुझे,जागूँ सारी रैन ।।

गोपिन के संग में मुरलीधर,
सांँझ ढले नित रास रचाए । बेसुध हों सब नृत्य करें ब्रज,
ज्यों मुरली धुन कृष्ण बजाएं । दिव्य अलौकिक ब्यार बहे जब,
भक्तन के मन प्रीत समाएं । मैं नटनागर की बन जोगन,
हर्षित हो सविता पद गाए ।।

नंद का लाल मोरा, गिरधर गोपाल मोरा,
मधुबन से गौउएँ चराकर आया ही नहीं
जाओ बलराम उसको ढूंढ ले आओ
मेरे मोहन ने आज कुछ खाया ही नहीं।

कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनायें ❤️🙏🏽

— सविता सिंह मीरा

*सविता सिंह 'मीरा'

जन्म तिथि -23 सितंबर शिक्षा- स्नातकोत्तर साहित्यिक गतिविधियां - विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित व्यवसाय - निजी संस्थान में कार्यरत झारखंड जमशेदपुर संपर्क संख्या - 9430776517 ई - मेल - meerajsr2309@gmail.com

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