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फिर वही निर्णय (लघुकथा)

फिर वही निर्णय

वह एक अजीब कोर्ट रूम था. पांच लोगों के अलावा किसी और को अंदर आने की इजाज़त नहीं थी. वादी, प्रतिवादी, उन दोनों के वकील और जज.
और उसे उसी कोर्ट रूम में खडा किया गया. उसके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा, जब उसने देखा कि वादी भी वही है, प्रतिवादी भी वही और तो और, दोनों वकील और जज भी वही है.
कुल मिलाकर वही खुद अपने ही पांच रूपों में वहाँ खडा था.
बहस छिड़ गई. वादी का वकील बन वह खुद पर ही आरोप लगाता गया और प्रतिवादी का वकील बन खुद उनका जवाब भी देता गया. ख़ास बात यह थी कि वह अपने किसी भी रूप में झूठ नहीं बोल पा रहा था.
बहस चलती रही. काफी आरोप लग गए. कुछ उसने खुद वकील बन कर साबित किये, कुछ उसने खुदने माने, कुछ कसूरों का उसने खंडन किया तो कुछ का उसने सबूत दिया कि वह कसूरवार नहीं. कुछ देर बाद सारी बहस ख़त्म हो गई. अब जज के रूप में उसे खुद ही को निर्णय करना था.
उसने खुद पर लगाए हुए आरोप पढ़े, खुद ही के द्वारा दी गईं दलीलें भी पढीं.
और उसने निर्णय दिया, “अभी बहुत कुछ बाकी है. फिर से वहीं जाना पडेगा, जहां से आया है. जन्म… और… जीवन का वक्त खत्म होने के बाद फिर यहाँ पेश होना…”
इसके आगे जज बना वह खुद ही कुछ और नहीं कह पाया, उसे पता ही नहीं था कि क्या कहना है.
और वे पाँचों आपस में मिल गए. वह एक होकर चिल्लाता रहा कि, “मुझे फिर नहीं जाना है, वहां बीमारियाँ हैं, दर्द है, अपमान है, दुःख ही दुःख है…”
लेकिन कोर्ट रूम तो खाली था. सुनता कौन?
फैसला भी तो उसी का अपना ही था.

डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी

नाम: डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी शिक्षा: विद्या वाचस्पति (Ph.D.) सम्प्रति: सहायक आचार्य (कम्प्यूटर विज्ञान) साहित्यिक लेखन विधा: लघुकथा, कविता, बाल कथा, कहानी सर्वाधिक अकादमिक प्रमाणपत्र प्राप्त करने हेतु तीन रिकॉर्ड अंग्रेज़ी लघुकथाओं की पुस्तक के दो रिकॉर्ड और एक रिकॉर्ड हेतु चयनित 13 पुस्तकें प्रकाशित, 10 संपादित पुस्तकें 33+ शोध पत्र प्रकाशित 50+ राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त फ़ोन: 9928544749 ईमेल: chandresh.chhatlani@gmail.com डाक का पता: 3 प 46, प्रभात नगर, सेक्टर-5, हिरण मगरी, उदयपुर (राजस्थान) – 313 002 यू आर एल: https://sites.google.com/view/chandresh-c/about ब्लॉग: http://laghukathaduniya.blogspot.in/

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