मुक्तक/दोहा

खुली किताब

जीवन खुली किताब है, छिपा न कोई राज।
अपनी अपनी राह है, अपना अपना काज।।1।।

जीवन साधन साधना, ना कोरी यह आस।
बोए बिना किसान को, मिलती नहीं कपास।।2।।

पुष्प चढ़ाना धर्म है, पुष्प खिलाना कर्म।
कर्म बिना पूजा सभी, नहीं धर्म का मर्म।।3।।

तिलक-दीप से क्या मिले, मन माहि अंधकार।
हल-कलम-कुदाल से, बनता है संसार।।4।।

माँग-माँग कर क्या मिला, खाली रहे हैं हाथ।
कर्म-बीज जो बो गया, फल भी पाया साथ।।5।।

गीता पढ़ना तो सरल, कठिन गीता सी चाल।
कथनी मीठी लगत है, करनी में ही ढाल।।6।।

एकाकी जपते सभी, सबकी अपनी चाह।
संग-संग तपता यहाँ, वही पकड़ता राह।।7।।

मंदिर-मंदिर ढूँढता, भटके चारों ओर।
मन को मंदिर कर लिया, अंदर बाहर भोर।।8।।

शब्द रटे से क्या भला, भाव न हो जब पास।
बीज बिना धरती धरे, उगती नहीं कपास।।9।।

राष्ट्रप्रेमी कर्म कर, कर न किसी की आस।
इससे बढ़कर जगत में, धर्म नहीं है खास।।10।।

सबका स्वागत कर रहे, आए जो भी साथ।
जिसको चलना साथ है, उसका थामें हाथ।।11।।

डॉ. संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी

जवाहर नवोदय विद्यालय, मुरादाबाद , में प्राचार्य के रूप में कार्यरत। दस पुस्तकें प्रकाशित। rashtrapremi.com, www.rashtrapremi.in मेरी ई-बुक चिंता छोड़ो-सुख से नाता जोड़ो शिक्षक बनें-जग गढ़ें(करियर केन्द्रित मार्गदर्शिका) आधुनिक संदर्भ में(निबन्ध संग्रह) पापा, मैं तुम्हारे पास आऊंगा प्रेरणा से पराजिता तक(कहानी संग्रह) सफ़लता का राज़ समय की एजेंसी दोहा सहस्रावली(1111 दोहे) बता देंगे जमाने को(काव्य संग्रह) मौत से जिजीविषा तक(काव्य संग्रह) समर्पण(काव्य संग्रह)

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