कविता

हिंदी दिवस

हिंदी बन पहचान ही, सदा बढ़ाती शान
विश्व इसे अपना रहा, मिलता इससे मान
बोली जाती खूब ही, बड़ी प्यारी भाषा,
सभी सीखें यही आशा, भारत की है आन।

विचारों का यह सेतु है, भाषा मीठी बड़ी
देखो चमके आज भी, बिंदी माथे जड़ी
हर जन लेता बोल, बड़ी ही प्यारी हिंदी।।
सब ही इसको जानते, थी यह बोली खड़ी।

हिंदी दिवस मना रहे, हिंदी है पहचान
हिंदी दिवस बढ़ा रहा, भारत का सम्मान,
सभी को ही सिखा रहे, हिंदी भाषा सीख,
देश अन्य अपना रहे, भारत की अब आन।

करते हैं अभिमान ही, लगती बिंदी भाल
हिंदी की जयकार हो, कहें धरा के लाल
दिवस हिंदी मना रहे, क्या अंग्रेज – सिंधी।
रहें मनाते हम सदा, लाखों सालों- साल।

— रवि रश्मि ‘अनुभूति’

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