भारत माता की गोद में यमराज
सुबह सुबह मित्र यमराज ने फोन कर कहा
प्रभु ! आप मेरा एक काम कर कीजिए
अपनी भारत माता को मेरा प्रणाम बोल दीजिए।
चौंकते हुए मैंने पूछा – मगर क्यों?
बंदा भड़क गया – यार लगता है धरती पर
तू ही मेरा सबसे बड़ा दुश्मन है,
जो इतने सवाल जवाब करता है
या फिर पूरी तरह मानव रुपी गधा है।
सुन! मुझे भी भारत माँ की गोद में आना है,
तुझे तो बस मेरा प्रणाम उन तक पहुँचाना है,
अब तू तो मेरी समझने से रहा
यमलोक की एक रस धारा से मैं उब गया हूँ,
बस इसीलिए उनकी कोख से जन्म
लेकर पुनर्जन्म की ख्वाहिश बताना चाहता हूँ।
उसकी बात सुन मैं मुस्कुराया
इसके लिए तो तू कहीं और भी तो
जाकर जन्म ले सकता है भाया,
हमारी भारत माता का ही बेटा क्यों बनना चाहता हूँ?
यमराज गुर्राया – मुझे पता था तुझे तकलीफ होगी
इसलिए यमलोक में तेरा अग्रिम प्रबंध कर दिया है
तेरी जगह मैं भारत माँकी गोद में खेलूँगा
और तू यहाँ अपना माथा पीटते रहना,
कहीं और जन्म लेने से अच्छा
जैसे भी हो यमलोक में ही रह लूँगा।
फिलहाल अब तू चुपचाप मेरा प्रणाम
और मेरा संदेश माता तक पहुँचा दे,
बाकी सब मैं कर लूँगा –
मगर तेरा एहसान बिल्कुल भी नहीं लूँगा,
ज्यादा नखरे दिखाया तो धरती माता से
नमक मिर्च लगाकर तेरी शिकायत कर दूँगा,
कुछ भी हो जाए अब मैं भारत माता की गोद में ही
नवजीवन की सगर्व शुरुआत करुँगा,
तेरे साथ लड़ने झगड़ने का सुख भी
इसी बहाने से खूब लेता रहूँगा।
