वैचारिक क्रांति का उजाला
जहां जय भीम है,
वहां अम्बेडकर है,
और जहां अम्बेडकर है
वहां अम्बेडकरवाद है,
यह सिर्फ एक नारा नहीं,
यह तो सदियों की चेतना का उजाला है,
जहां गूंजता है न्याय का स्वर,
वहां आत्मसम्मान का बहता समंदर है,
जहां जय भीम है,वहां अम्बेडकर है,
वह महामानव,वह क्रांति का पथिक,
जिसने तोड़ी रूढ़ियों की हर जंजीर,
जिसने कलम से बदली करोड़ों की तकदीर,
जहां समता,बंधुता और न्याय की डगर है,
वहां साक्षात बाबा साहब का असर है,
और जहां अम्बेडकर है,वहां अम्बेडकरवाद है,
अम्बेडकरवाद यानी अज्ञान से शिक्षा की ओर बढ़ना,
अम्बेडकरवाद यानी अधिकारों के लिए मिलकर लड़ना,
यह सोच है शोषितों को उठाने की,
यह राह है देश को महाशक्ति बनाने की,
जहां मानवता का अधिकार ज़िंदा है,
वहां बाबा साहब का हर विचार ज़िंदा है,
जब तक सूरज चांद रहेगा,
यह कारवां यूं ही आगे बढ़ेगा,
क्योंकि जहां जय भीम की ललकार है,
वहां बदलाव का हर द्वार है।
— राजेन्द्र लाहिरी
