गणपति राखो मेरी लाज
सुदी चौथ भादव को प्रगटे, श्री गजानन जी महाराज,
वरद विनायक मंगलकारी, गणपति राखो मेरी लाज ।
चरण कमल में शीश नवाऊं, प्रथम देव तुमको मनाऊॅं,
नित्य प्रेम से कीर्तन गाऊं, भाव सुमन तुम्हें नित चढ़ाऊं,
रिद्धि-सिद्धि के हो तुम स्वामी, सफल करो सब मेरे काज,
वरद विनायक मंगलकारी, गणपति राखो मेरी लाज ।
रक्त पुष्प सिंदूर चढाऊॅं, चंदन केशरिया लगाऊॅं,
कानों में कुण्डल पहनाऊॅं, बूॅंदियॉं का भोग बनाऊॅं,
भक्तों की सेवा स्वीकारों, कृपा करो अब हे गणराज !
वरद विनायक मंगलकारी, गणपति राखो मेरी लाज ।
भक्त मंडली सदन बुलाऊॅं, उत्सव शुचिता से मनाऊॅं,
स्तुति जप मंत्रोच्चार कराऊॅं, सुबह-शाम आरती गाऊॅं,
हर कर जीवन से विघ्नों को, “आनंद” भरो हे शिवराज !
वरद विनायक मंगलकारी, गणपति राखो मेरी लाज ।
भक्त प्रेम से अर्जी लाएं, मंगलमूर्ति तुम्हें बुलाएं,
शुद्ध भाव से तुमको रिझाएं, विपदाओं से मुक्ति पाएं,
प्रेम प्रार्थना भक्तजनों की, अब तो सुन लो हे गजराज !
वरद विनायक मंगलकारी, गणपति राखो मेरी लाज ।
— मोनिका डागा “आनंद”
