रुकें नहीं हम चलते जाएं
रुकें नहीं हम चलते जाएं।
मुश्किल चाहे जितनी आएं।।
जीवन का हम लक्ष्य बनाएं।
मगर नहीं बिल्कुल घबराएं।।
बाधाएं पथ में आयेंगी।
डरा आपको भटकाएंगी।।
मगर नहीं है हमको डरना।
चाहे जितना होगा लड़ना।।
हर जीवन की यही कहानी।
मुफ्त मिले अब दाना-पानी।।
फिर भी हम सब जीवन जीते।
घाट-घाट का पानी पीते।।
रुकने से हल मिले न कोई।
जानें कितनी आँखें रोई।।
हिम्मत करके बढ़ते जाना।
नहीं बनाओ व्यर्थ बहाना।।
खुद की ताकत खुद ही बनना।
पीछे आप कभी मत हटना।।
नव जीवन आयाम है लिखना।
निज कर्तव्य से तुम मत डिगना।।
