मुक्तक/दोहा

दीपावली दोहे

बोला माटी का दिया, मेरा नाम “प्रकाश”।
धरती है मैया मेरी, और पिता आकाश॥

सूरज हैं ताऊ मेरे, ताई जी हैं धूप।
चन्दा चाचा, चाँदनी चाची के समरूप॥

मैं नन्हा सा दीप हूँ, पाऊँ सबका प्यार।
मुझे हवा की थपकियाँ देतीं लाड़-दुलार॥

मन्दिर में मुझको मिले, नव बीती, नित तेल।
आँगन में जलता हुआ, खेलूँ असली खेल॥

तूफ़ानों का डर नहीं, हम हैं ऐसे दीप।
अन्धकार पीते सदा, युगों के प्यासे दीप॥

जिस दिन आये अवध में, लंका से श्री राम।
तब से दीपों को सजा, घर-घर बैठी शाम॥

इस बरस में आज फिर, आया यह त्यौहार।
छोटों को स्नेह, बड़ों का हो आदर-सत्कार॥

— देवकी नन्दन “शान्त”

देवकी नंदन 'शान्त'

अवकाश प्राप्त मुख्य अभियंता, बिजली बोर्ड, उत्तर प्रदेश. प्रकाशित कृतियाँ - तलाश (ग़ज़ल संग्रह), तलाश जारी है (ग़ज़ल संग्रह). निवासी- लखनऊ

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