मुसाफ़िर
मुसाफ़िर चल पड़ा सफ़र पर
मार्ग मुश्किलों से भरा लगा
हिम्मत ने दामन न छोड़ा
दर्द कभी हार की निराशा
मन में कायम रही पर आशा
मुसाफ़िर मंज़िल की चाह में
चलता रहा पथ पर आस में
एक साधारण सा सफ़र मगर
ज़िन्दगी में कर गया गहरा असर
मंज़िल की ज़िद्द ने फिर भी
मुसाफ़िर को रुकने न दिया
मंज़िल सामने इंतज़ार में
मुस्कुराकर इम्तिहान का
असर देख रही थी।
— कामनी गुप्ता
