एक पाती
जब आसपास कोई
तुझे सुनने वाले ना रहें
एक पाती प्यार भरी
खुद के लिख
यकीन मानों स्व से स्वयं
का मिलन अकल्पनीय होगा ।
ऋतु परिवर्तन के किस्से
फूलों से बातें करते
अहसास होता शारिरिक
सुंदरता क्षणभंगुर है
आत्मबोध से मन में
बचपन फिर खिलखिला उठता ।
दूसरों की समस्याएं सुन
पीड़ा के बदले परमपिता को
धन्यवाद करने के लिए दोनों
हाथ वक्त भूल कर
नतमस्तक सदैव रहता
ऐसी पाती रोज लिखते
वक्त का पता नहीं चलता ।
— आरती रॉय
