ग़ज़ल
धरती न आकाश मिला
फिर से कोई निराश मिला
देख विषैली दुनिया को,
जीवन में संत्रास मिला।
जीवन की गति न्यारी है,
दर्द भरा उपहास मिला।
आग और पानी पर चल,
उलझा हुआ विकास मिला।
अदबी दुनिया की गाथा,
गीतों सा एहसास मिला।
जाने कौन निशाने पर,
निकला तीर उदास मिला।
देवों को पूजा था लेकिन,
जीवन में दुःख रास मिला।
अंधियारों से लड़कर ही,
मुझको नया प्रकाश मिला।
— वाई. वेद प्रकाश
