कविता

।। जांबाज।।

२५ साल बाद ९/११ की घटना को
फिर से दोहराने की हुई चेष्टा
कैप्टन माछर ने दिखाई जिंदादिली
सह-पायलट रह गया सिर्फ देखता।

३० सितम्बर की वो खुशनुमा सुबह
दुबई से विमान ने भरी उड़ान
इससे पहले कि तेल अवीव पहुंचता
सह-पायलट पर उतर आया शैतान

धोखे से वार किया अपने साथी पर
विश्वास की नींव तक हिला डाली
स्मित माछर को किया लहूलुहान
१७४ जिन्दगियां खतरे में डाली ।

पर भारत के इस वीर जांबाज का
फिर भी न डोलने पाया हौंसला
न की अपने बहते ख़ून की परवाह
फ़ौरन काकपिट का दरवाजा खोला

दिया अदम्य साहस का परिचय
और सैकड़ों लोगों की जान बचाई
हुआ जग में उनका नाम रोशन
देश- विदेश से मिल रही बधाई ।

कर्तव्य को उन्होंने सब कुछ माना
विकट परिस्थितियों को पहचाना
अपनी तकलीफों पर न गया ध्यान
यात्रियों की सुरक्षा को सर्वस्व जाना

हर तरफ है जब अधिकारों का जोर
एवं कर्तव्यों से इंसान रहा मुख मोड़
भारत के इस महान सपूत ने
संस्कारों की थी थाम रखी थी डोर।

आप जल्द स्वस्थ हों और घर लौटें
सबकी है प्रभु जी से यही प्रार्थना
गर्व है आप पर हर भारतवासी को
स्वीकार कीजिए हमारी शुभकामना

— नवल अग्रवाल

*नवल किशोर अग्रवाल

इलाहाबाद बैंक से अवकाश प्राप्त पलावा, मुम्बई

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