नहीं चलना
अंधेरे में सनसनाते सन्नाटे में मुझे नहीं चलना दौड़ना मैं व्याकुल, परेशान ड़रता हूँ खनखती पत्तियों से झींगुरों की झीं
Read Moreक्यों? राख हथेली पर रखूँ सवाल करूँ हल्के फुल्के उलझे अपनों से, अभी राख चंद मिनटों में उड़ जायेगी या घुल
Read Moreप्यासा गला रूठा बर्तन खाली पानी नहीं है तमन्ना जगी है पी लूँ दो घूँट पर उदासीनता सामने हाथ पसारती
Read Moreतुम कहाँ हो? खोये खोये रहते हो क्या तुम्हारा कोई वजूद है? या हासिल करना चाहते हो कुछ नया। जिंदगी
Read Moreमैं बीज हूँ दबा हूँ मिट्टी में ॉछुपा बैठा हूँ देखता इर्दगिर्द। मैं सदा सादा जीवन जीता हूँ भरता हूँ
Read Moreबुझा बुझा जीवन है शायद अपना आशा निराशा है मन में कटु जटिलता पनपती है संघर्ष भरे दौर है दीप
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