दीवार – ए- जिंदगी
यह कैसी बेवकूफी है,हमें समझ में नहीं आता है।एक महफ़िल की शान था मैं,एक दीवार आज़ टूटा है फिर आज़,लोगों
Read Moreयह कैसी बेवकूफी है,हमें समझ में नहीं आता है।एक महफ़िल की शान था मैं,एक दीवार आज़ टूटा है फिर आज़,लोगों
Read Moreलम्हे जो बीत गए,जन्नत की जगह थी।पास ही है आज भी,दिल में बसी हुई खुशियां और सुकून देने वाली ताकत
Read Moreज़िद, घमंड ,जुबान और अंहकार को,नज़रों से गिरा मानकर,एक महफ़िल में आनेवाले लोगों को,कुछ समझाने की कोशिश करती है।घर टूटने
Read Moreइस ताकत को बढ़ाने में,मां की दुआओं से रूबरू होना पड़ता है।शिखर पर पहुंचने का,रास्ता यही से निकलते हुए,तरक्की और
Read Moreमां-बाप है तो,हुनर है।जिंदगी में खोई हुई खुशियां को लाने का,सबसे खूबसूरत उपहार है,हम कह सकते हैं,यही सबसे बड़ी चुनौती
Read Moreइसकी पहुंच ऊंची है,खिदमत में पेश होती एक सुखद अहसास है।मन को तसल्ली देती है,यही इस व्यवस्था को,मजबूती प्रदान करने
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