गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 18/09/2015 गजल जाने कैसे हमें लग गया मर्ज़ ये है संगीन बहुत, अपनी तबियत थोड़े दिनों से रहती है गमगीन बहुत दीवानों Read More
गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 15/09/201517/09/2015 ग़ज़ल कायम जिसके दिल में आज भी ईमान रहता है, वो शख्स इस दुनिया में अब परेशान रहता है मजमा लग Read More
कविता *भरत मल्होत्रा 14/09/2015 कविता कवि के अंतर्मन से निकली, कविता भी रूठ जाती है कभी, अपने ही रचयिता से, बिल्कुल उसी तरह जैसे, छोटा Read More
गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 12/09/2015 गजल मुझपे ये आखरी एहसान कर दे, बस मेरा हौसला चट्टान कर दे आज़माइश से ना हो खौफ मुझको, मुसल्लम तू Read More
गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 09/09/2015 गजल इक तो अब हो गई पुरानी भी, हमको आती नहीं सुनानी भी तुम अपने गम से भी नहीं खाली, है Read More
गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 08/09/2015 गजल कातिल चारागर लगता है, हवा में घुला ज़हर लगता है किसको दें आवाज़ यहां अब, दुश्मन सारा शहर लगता है Read More
गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 06/09/2015 गजल कोशिश कर भी लो आदत खानदानी नहीं जाती, चोर चोरी से जाए पर बेईमानी नहीं जाती, खज़ाने खत्म हुए सारे Read More
गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 04/09/2015 गजल दो जवाँ दिलों का ग़म दूरियाँ समझती हैं कौन याद करता है हिचकियाँ समझती हैं तुम तो ख़ुद ही क़ातिल Read More
गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 03/09/2015 बिटिया के जन्मदिवस पर विशेष आज मेरी बिटिया के जन्मदिवस पर विशेष। आप सब का आशीष अपेक्षित है। मैं सब कुछ भूल जाता हूँ वो Read More
गीतिका/ग़ज़ल *भरत मल्होत्रा 21/08/201521/08/2015 गजल ज़ख्मी जब भी ईमान होता है, सब्र का इम्तिहान होता है सच का साथी नहीं यहां कोई, मुखालिफ ये जहान Read More