प्रकृति का दण्ड
प्रकृति का दण्ड ************* हमनें खूब लुटा खसूटा प्रकृति को पर वोह मौन रही समझ अपनी संतति खामोश रही सोचा
Read Moreप्रकृति का दण्ड ************* हमनें खूब लुटा खसूटा प्रकृति को पर वोह मौन रही समझ अपनी संतति खामोश रही सोचा
Read Moreनीर बनके आंखो से जो छलछलाए शायद अब लोगों की आंखों से उड़ गया रोते को हंसा दे जो पीर
Read Moreजीवन मृत्यु ********* जीवन क्या और मृत्यु क्या दोनों के बीच है एक झीना सा परदा परदे के एक तरफ
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