कुंडलिया छंद
जनता अपनी रो रही, नेता करते लूट। सत्ता अपनी सो रही, चोर पा गए छूट॥ चोर पा गए छूट, घोटाला
Read Moreजनता अपनी रो रही, नेता करते लूट। सत्ता अपनी सो रही, चोर पा गए छूट॥ चोर पा गए छूट, घोटाला
Read Moreतन है कविता मन है कविता, लय सुर ताल का धन है कविता। रास है कविता रंग है कविता, जीने
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