गीतिका
हाथों में गरल तीर हैं , षड्यंत्र भरा मन ।ऐ व्याध ! तुझे शाप है, निश्चित तेरा पतन । पाषाण
Read Moreनैहर की कर बात रे , सखी सावन आयो !मोतिन की बरसात रे, सखी सावन आयो ! महकि उठी होई
Read Moreतुम क्या जानो पतझड़ में हम घुट घुट कर कैसे अकुलाये ! मधुकर तुम वापस तो आये ! अनावृत्त मुझको
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