विलक्षण प्रतिभा के धनी समता पुरुष बाबू जगजीवन राम
बाबू जगजीवन राम ने अपने जीवन के 50 वर्ष की राजनीति में अपनी विलक्षण प्रतिभा से देश की महान सेवा
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Read Moreअखंड हो!समृद्ध हो! गणतंत्र हमारा प्रबुद्ध हो! भारत का यह अमर गणतंत्र। कितना सुंदर है यह प्रजातंत्र! भारत के संविधान
Read Moreदेश का संविधान राष्ट्र का आईना ही नहीं बल्कि एक राष्ट्र का प्रकाश है। जो राष्ट्र को मार्गदर्शक बन कर
Read Moreसौंदर्य के गंगाजल में, मैं खुशियां बांट देता हूं। खुद जलकर भी सदा, मैं रूप सजा देता हूं। दुःख में
Read Moreप्रकाश देता है जीवन में उर्जा, सौंदर्य, खुशहाली, समृद्धि का संचार, उमंग, हौसलों कि नई उड़ान, नई सौगात।दीप जीवन के
Read Moreमैं दीप जलाकर रखता हूं। मैं मंगल गीत गाता हूं। मैं हौसलों को मुट्ठी में रखता हूं। मैं खुशियों के
Read Moreधरती पर निराली हिंदी। आसमान को छू गई हिंदी। मन भावों में भा गई हिंदी। झरने सी मीठी हे हिंदी।।
Read Moreहिंदी रस की खान है। हिंदी भारत की शान है हिंदी हमको नव ज्ञान दे। हिंदी सब को वरदान दे।
Read Moreभाषा समाज की पूंजी है जो निरंतर प्रवाह मान के साथ अपनी संस्कृति और संस्कारों की सदा संवाहक होती है।
Read Moreहिंदी मां की ममता जैसी। हिन्दी मां की लोरी जैसी। हिंदी सितार की है झंकार। हिंदी सिखने की है ललकार।
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