गीतिका/ग़ज़ल डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह 03/04/202204/04/2022 रूला देती है याद आती है तो फिर , हर बात रुला देती है, वो रात चांद तारों की, वो रात रुला देती Read More
कविता डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह 03/04/202203/04/2022 बसंत पर्व सखी सहेली इठलाती , सजती और संवर जाती , उमंगें लेकर सजना की , देखो तुम भी , प्यार हमारा Read More
गीतिका/ग़ज़ल डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह 03/04/202203/04/2022 गज़ल आए माहज़बी मेरे रूबरू कोई तो गजल मैं लिखूँ, गहराईयों को दिल की मेरे कोई छू ले तो गजल मैं लिखूँ, पी Read More