कर्म सिद्धान्त
वेद पुराणों की प्रखर वाणी,मत बन मानव तू अभिमानी,यदि ये बात तूने जो न मानी,भुगतेगा, न चलेगी मनमानी । जन्म
Read Moreवेद पुराणों की प्रखर वाणी,मत बन मानव तू अभिमानी,यदि ये बात तूने जो न मानी,भुगतेगा, न चलेगी मनमानी । जन्म
Read Moreनया करने का जुनून जिंदा है भीतर,अलग हैं मेरे सपनें, मैं नकारा नहीं हूं,ये माना नसीबो का ये सारा खेला
Read Moreदेव दीपावली की बहुत – बहुत बधाई ! कार्तिक मास की पूर्णिमा को देव दीपावली कहा जाता है। यह दीपावली
Read Moreहरी-भरी तुलसी खिली रहती मेरे आंगन मनभावन,बारहों मास बरसे सुख का अमृत”आनंद” सावन । प्रतिदिन सुबह शाम धूप, दीप, आरती
Read Moreकलम की ताकत को सच में तुम मानो बेजोड़,अच्छे-अच्छे को कर देती ये भ्रमित और मोड़,लिखित शब्दों का जादू सर
Read Moreप्रभा के पुंज, लोक प्रकाशक,दीप्ति मूर्ति रवि को मेरा प्रणाम है ।महातेजस्वी, सुवर्ण सदृश रश्मिमान,अरुण, आदित्य को मेरा प्रणाम है
Read Moreएक चकोर उस चांद और चांदनी का बड़ा दिवाना हैं,रात की कली ने जिसको अपना सब कुछ माना है,इंतजार के
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