गीतिका/ग़ज़ल प्रीती श्रीवास्तव 25/09/201925/09/2019 गीतिका वो माँ मौत मांग रही थी आज अपने लिये। चराग की रौशनी में जिसने कपड़े सिये।। अब उसकी आँखों में Read More
गीतिका/ग़ज़ल प्रीती श्रीवास्तव 10/08/2019 ग़ज़ल कसक दिल में उठती रहेगी तुम्हारे लिये। आंख भी रोज भरती रहेगी तुम्हारे लिये।। बेरूखी तुम्हारी दर्द मेरा बढ़ाती ही Read More
गीतिका/ग़ज़ल प्रीती श्रीवास्तव 24/07/2019 गजल मिला क्या मुहब्बत जताकर हमें। गया मुस्कुराते रूलाकर हमें।। ये दिल मानता कब हमारी सनम। हुआ खुश ये अक्सर जलाकर Read More
गीतिका/ग़ज़ल प्रीती श्रीवास्तव 27/05/2019 गजल/ गीतिका अब कहां लोग प्यार करतें हैं । इश्क में बस शिकार करतें हैं।। पूरे अरमान करने को वो तो। रूप Read More
गीतिका/ग़ज़ल प्रीती श्रीवास्तव 22/04/2019 गजल चैन से जी रही थी क्यूं सताने आ गये। दिल में घर अपना क्यूं बनाने आ गये।। मिलता नही करार Read More
गीतिका/ग़ज़ल प्रीती श्रीवास्तव 31/03/201903/04/2019 गजल वक्त ये कटता नही इन्तजार का। खत तेरा आता नही इकरार का।। बस ख्यालों में तेरे यूं ही डूबी रहूं। Read More
गीतिका/ग़ज़ल प्रीती श्रीवास्तव 24/02/2019 ग़ज़ल नाकामियों के डर से हम रास्ते बदलते रहे। लोग हमें रोज नये मिले और हमें छलते रहे।। भरोसे का न Read More
गीतिका/ग़ज़ल प्रीती श्रीवास्तव 13/01/201913/01/2019 ग़ज़ल शम्मा की तरह परवाना जलता रहेगा। ताक मे बैठकर वो आहे भरता रहेगा। नही आमंत्रण है उसे करीब आने का। Read More
गीतिका/ग़ज़ल प्रीती श्रीवास्तव 18/12/201818/12/2018 गजल हमको हमारा गम भी प्यारा है। गम है कि गम दिया तुम्हारा है।। गुमान करने की इम्तहां हो गई। नही Read More
गीतिका/ग़ज़ल प्रीती श्रीवास्तव 26/11/2018 गीतिका निभाया हैं हमने और निभाते रहेंगे तेरी बज्म में हम तो रोज आते रहेंगे खुदा का करम है हम पर Read More