ग़ज़ल
दिल नही बस में शरारत देखकर। रंग लिया खुद को मुहब्बत देखकर।। शर्म से चहरा हुआ रूखसार ये। आइने में
Read Moreकहकर भी यारों मुकर गया वो। वादा खिलाफी मुझसे कर गया वो।। ताउम्र जलती रही शम्मा मगर। जमाने के डर
Read Moreउसे इश्क की आग में अब जलने दो। कैदियों की तरह उसे भी मचलने दो।। हो गये रूसवा जमाने में
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