गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

पहलू में बैठ कर तेरे मेरे कम़र लिखूं।
जी चाहता है आज तुझे रात भर लिखूं।।
जो कह दे तू जहां को भुला दूं तेरे लिये।
तेरे ही नाम कह दे तो सारी उमर लिखूं।।
ये सादगी तेरी ये तेरा बांकपन सनम।
कहता है दिल मेरा तुझे शामों सहर लिखूं।।
दिल पर मेरे कोई है अख्तियार तो नही।
दिल से मिला जो दिल फिर दिल की खबर लिखूं।।
लिखा जो खत नही ये जलाया गया सनम।
रख लूं छुपा के या के तेरा घर शहर लिखूं ।।
दिल में रखा है मैने छुपा नाम तक तेरा।
तू ही बता कि कैसे तुझे उम्र भर लिखूं।।
— प्रीती श्रीवास्तव

प्रीती श्रीवास्तव

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