कविता

नारी की माया

धरती से लेकर अम्बर तक
नारी की ही माया है
देव दनुज मानव दानव सब
नारी की ही छाया है

जो भी भू पर आया उसको
नारी ने ही जाया है
सृष्टि के कण कण में होता
नारी का ही साया है

चीर हरण पर मौन साधकर
नारी का अपमान किया
उसी समय से कौरव दल ने
निज कुटुंब बेजान किया

लाज बचाई द्रोपदी की तब
कृष्ण का ईश्वर नाम हुआ
भीष्म पितामह मौन रहे तो
शर शैय्या विश्राम हुआ

शक्ति स्वरूपा जगदम्बा है
नही कभी वो है अबला
विश्व मंच पर जाकर देखो
नारी है सबसे सबला

दुनियाँ को दुनियाँ करती है
बहना माँ पत्नी बनकर
है इतिहास साक्षी रक्षा
करती है काली बनकर

शक्ति स्वरूपा जगदम्बा
माँ देवी रूप में रहती है
जन्म मृत्यु औऱ मोक्ष मुझे में
दुर्गा बनकर कहती है

भले कोई भी दौर हो जग में
इसका है सम्मान हुआ
मगर ऋषभ कुछ दुष्ट जनों ने
नारी का अपमान किया

— ऋषभ तोमर

ऋषभ तोमर

अम्बाह मुरैना