चाँद पूनम का
अमर है ज्योत्स्ना उसकी, शरद की शीत है देखो,शिफ़ा ये बटता जग को, तपस पर जीत है देखो। उमस लू
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Read Moreशिव आदिनाथ, शिव नील कंठ,रखे शीश गंग , सजे चन्द्र माथ।प्रभु दीन हीन जड़ सबके नाथ,पशु प्रेमी शिवजी पशुपतिनाथ। कर
Read Moreजब भी सोचने बैठता हूँ या कल्पनाओं के समंदर में गोते लगाने के लिये सुबह आँख बंद करता हूँ या
Read Moreअगर कोई मुझसे कहे प्रेम क्या है? तो निसंदेह मेरे पास कोई कोई उत्तर नही होगा लेकिन मैं उससे इतना
Read Moreफर्ज मोहब्बत का दिल से निभाने के लिए आ हँसने लगा हूँ अब मुझको रुलाने के लिये आ बहुत नुकशान
Read Moreजिंदगी जिंदगी नही मेरी मगर तुम्हें क्यो मलाल दूँ खुश रहो मैं भी खुश हूँ बोल कुछ लम्हें खुशहाल दूँ
Read Moreधरती से लेकर अम्बर तक नारी की ही माया है देव दनुज मानव दानव सब नारी की ही छाया है
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