Author: प्रियंका सौरभ

सामाजिक

भीख मांगने की प्रथा: मदद की गुहार या एक सुनियोजित धंधा?

भारत में भीख मांगना धार्मिक दान से जटिल सामाजिक-आर्थिक समस्या बन गई है। व्यस्त सड़क पर, हाथ बढ़ाना मदद के

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सामाजिक

बेटी नहीं बचाओगे, तो बहू कहाँ से लाओगे?

 बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम ने बेटे को प्राथमिकता देने के मुद्दे पर सफलतापूर्वक जागरूकता बढ़ाई है, लेकिन अपर्याप्त कार्यान्वयन

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राजनीति

नई कृषि योजना से किसान हो पायेगा धन-धान्य पूर्ण?

बजट में प्रत्यक्ष सब्सिडी की तुलना में वित्तीय सहायता को अधिक प्राथमिकता दी गई है, जिससे यह सुनिश्चित होता है

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समाचार

हिंदी लेखकों का अनूठा सम्मान: ‘जिला नज़र’ ने प्रकाशित किया विशेष कैलेंडर

आगरा/हिसार। हिन्दी भाषा और लेखन के क्षेत्र में समर्पित लेखकों का मान-सम्मान करना आज के समय में दुर्लभ हो गया

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सामाजिक

सामाजिक नैतिकता को दीमक सरीखा चाट रहा एकल परिवारों का चलन

 बढ़ते एकल परिवारों ने हमारे समाज का स्वरूप ही बदल दिया। आजकल के बच्चों को वो संस्कार और अनुशासन नहीं

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राजनीति

प्रयागराज भगदड़: प्रशासनिक लापरवाही या भक्तों का उन्माद।

एक पौराणिक शहर की सीमाओं पर विचार करना चाहिए, जिसे अपनी धार्मिक विरासत को बनाए रखते हुए आठ करोड़ लोगों

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