स्वयं-चेतना से सजे, नारी का संसार
समय तुम्हारा जो लगे, करने में श्रृंगार,स्वयं-ज्ञान में लग सके, हो नारी उद्धार॥ हे नारी, पहचान तू, अपने मन का
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Read Moreगूंगे थे, अंधे बने, सुनती नहीं पुकार,धृतराष्ट्रों के सामने, गई व्यवस्था हार॥ सत्ता के गलियार में, गूंजे केवल शोर,सत्य यहाँ
Read Moreएक समय था जब बारात का आना केवल एक परिवार का दूसरे परिवार तक पहुँचना नहीं, बल्कि पूरे गाँव का
Read Moreजबलपुर की लहर में, भरी समंदर पीर,ममता का वह रूप था, ईश्वर की तस्वीर॥ क्रुज की उस चीख में, गूँजी
Read Moreआज के समय में पीएचडी (Doctor of Philosophy) को लेकर समाज में अनेक धारणाएँ प्रचलित हैं। कुछ लोग इसे केवल
Read Moreयोगी भोगी हो गए, संत चले बाजार।अबलाएँ मठ-लोक से, रह-रह करें पुकार॥ माटी की मर्याद भी, हुई आज बेहाल,धर्म-ध्वजा के
Read Moreअपने प्यारे गाँव से, बस है यही सवाल।बूढ़ा पीपल है कहाँ, गई कहाँ चौपाल॥ माटी की सोंधी महक, अब लगती
Read Moreभारत में उच्च शिक्षा का तीव्र विस्तार अवसरों के साथ-साथ गंभीर चुनौतियाँ भी लेकर आया है। एक ओर विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों
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Read Moreमूक हुई किलकारियाँ, गुम बच्चों की रेल।गूगल में अब खो गये, बचपन के सब खेल॥ आँगन सूना हो गया, चुप
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