बारिश आई गाँव की, भीग उठे अरमान
बारिश आई गाँव की, भीग उठे अरमान।बूँद-बूँद में खिल उठा, बचपन का सम्मान॥ खिड़की पर बरसात ने, लिख दी नई
Read Moreबारिश आई गाँव की, भीग उठे अरमान।बूँद-बूँद में खिल उठा, बचपन का सम्मान॥ खिड़की पर बरसात ने, लिख दी नई
Read Moreसरकारी स्कूल हैं, शिक्षा की पहचान।स्कूल बचेंगे तो बचे, संस्कार और ज्ञान॥ माटी की खुशबू लिए, खिलते नन्हे फूल।भारत का
Read More“गाँव की हर चीज़ चाहिए, लेकिन गाँव नहीं चाहिए।” यह एक साधारण-सा वाक्य नहीं, बल्कि आधुनिक भारतीय समाज की बदलती
Read Moreचेहरे भोले ओढ़कर, रखते मन में दाँव।भेड़ों में कुछ भेड़िये, घुसकर देते घाव॥ भेड़ों जैसे बीच में, छिपा हुआ शैतान।मौका
Read Moreफीकी हँसी मुख लिए, भीतर गहरा शोक।हँसते-हँसते जी रहे, मन को कितना रोक॥ पगडंडी की छाँव थी, सड़कों का विस्तार।सुविधाओं
Read Moreनन्हे हाथों की खुशी,भोली-सी मुस्कान।हाथी संग खेला करे,मेरा नन्हा जान॥ पीला-नीला हाथिया,चलता धीरे-धीरे।हँसी बिखेरे आँगना,खुशियाँ घेरे-घिरे॥ धक्का देकर बोलता,“चल रे
Read Moreहर साल श्रावण के पवित्र महीने में, उत्तर भारत की सड़कें केसर से भर जाती हैं, क्योंकि लाखों कांवड़िया कांवड़
Read Moreनन्हे हाथों की खुशी, नभ जितने अरमान।गेंद संग ही खेलता, अपना सारा जहान॥ छत हो, गाड़ी या गली, हर जगह
Read Moreसावन सिर्फ बारिश का मौसम नहीं है, बल्कि जीवन के सभी रूपों का उत्सव है। भारत मानसून के आगमन के
Read Moreमुख पर कितने रंग हैं, भीतर सूना गाँव।सच की पगडंडी मिली, छोड़ गए सब ठाँव॥ सेवा यदि हो नाम की,
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