गीत/नवगीत

गीत

बने विजेता वो सदा, ऐसा मुझे यकीन।
आँखों में आकाश हो, पाँव तले जमीन॥

सपनों को आकार दे, रख मन में विश्वास,
मेहनत की हर सीढ़ियाँ, देती नव प्रकाश।
हिम्मत जिसके साथ हो, जीते हर संगीन—
आँखों में आकाश हो, पाँव तले जमीन॥

ऊँचे शिखरों पर रहे, फिर भी मन में मर्म,
सफलता के बीच भी, रखे सदा सत्कर्म।
अभिमान भी न छू सके, ऐसा हो प्रवीण—
आँखों में आकाश हो, पाँव तले जमीन॥

धूप कठिन हालात की, चाहे करे प्रहार,
संकल्पों की शक्ति से, बाधा करे वह पार।
संघर्षों के बीच भी, रखे हृदय नवीन—
आँखों में आकाश हो, पाँव तले जमीन॥

जग में वही महान है, बाँटे जो मुस्कान,
अपने संग औरों का, भी करता उत्थान।
सौरभ ऐसी जीत को, माने जग हसीन—
आँखों में आकाश हो, पाँव तले जमीन॥

— डॉ. प्रियंका सौरभ

*डॉ. प्रियंका सौरभ

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, (मो.) 7015375570 (वार्ता+वाट्स एप) facebook - https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/ twitter- https://twitter.com/pari_saurabh

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