खिलने पर इतराओ न
खिलने पर इतराओ न, तुम ही तोड़े जाओगे सीने में नस्तर रख कर, तुम ही जोड़े जाओगे खुशबू काबू में
Read Moreखिलने पर इतराओ न, तुम ही तोड़े जाओगे सीने में नस्तर रख कर, तुम ही जोड़े जाओगे खुशबू काबू में
Read Moreआधुनिकता! हजम कर रही आदर, संस्कार, दुनियां के साथ साथ बदल रहा सभी का स्वभाव जहां एक ओर अपना भारत
Read Moreआज थोड़ा बरस वो गए हैं तपिश में थोड़ी कमी आ गयी है गर्दिश ही गर्दिश नजर आ रही थी
Read Moreसजने सँवरने की ज़रूरत ही क्या है दिखावा नही तो ये और क्या है कई तीर तरकस में रख कर
Read Moreआजादी से पहले देश के एक ओ भी नेता थे जिन्होंने अपनी जान पर खेल कर गुलाम देश को आजाद
Read Moreनव वर्ष की नई किरन से, नया उजाला कायम हो मिटे मुफलिसी जग से,मधुरिम निवाला कायम हो नई सफलता अर्जित
Read Moreहर शहर यहाँ का क़ातिलों से भरा है जो भी यहाँ मरा वो निग़ाहों से मरा है तिरछे वार से
Read Moreहमसे बेखर हैं ओ, हम जिनकी खबर रखते हैं चुपके से गुजरते ओ, हम फिर भी नजर रखते हैं सुनाते
Read Moreआज लाश जलानें पर इतना शोक क्यों? आत्मा तो बहुत पहले ही मर चुकी थी आज तो शरीर मरा है!
Read Moreसब मयखाने बेकार लगे अब नजर ही काफी थी उनकी अब होश बाकी रहा नही मय अभी बाकी थी उनकी
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