गीत “माया की झप्पी”
सूरज चमका नीलगगन में, फिर भी अन्धकार छाया धूल भरी है घर आँगन में, अन्धड़ है कैसा आया वृक्ष स्वयं
Read Moreसूरज चमका नीलगगन में, फिर भी अन्धकार छाया धूल भरी है घर आँगन में, अन्धड़ है कैसा आया वृक्ष स्वयं
Read Moreबचा हुआ जो नेह है, उसको रहा सहेज। बुझने से पहले दिया, जलता कितना तेज।। क्या जायेगा साथ में, करलो
Read Moreतुमको शत्-शत् मेरा प्रणाम। श्रद्धा-सुमन समर्पित तुमको, जग में अमर तुम्हारा नाम।। हे व्रतधारी-संयमी तुम्हारी, महिमा को हम गाते हैं।
Read Moreबादल मचा रहे हैं शोर। नाच रहा जंगल में मोर।। बहुत डराते काले बादल। लेकिन मोर हुए हैं पागल। बदरा
Read Moreविघ्न विनाशक मंगलकारी। तुलसी का पौधा गुणकारी।। यह पावन परिवेश बनाता, इसीलिए तो पूजा जाता, तुलसी का बिरुआ करता है,
Read Moreअब कैसे दो शब्द लिखूँ, कैसे उनमें अब भाव भरूँ? तन-मन के रिसते छालों के, कैसे अब मैं घाव भरूँ?
Read Moreज़िन्दगी को आज खाती है सुरा। मौत का पैगाम लाती है सुरा।। उदर में जब पड़ गई दो घूँट हाला,
Read Moreसीधा-सादा, भोला-भाला। बचपन होता बहुत निराला।। बच्चे सच्चे और सलोने। बच्चे होते स्वयं खिलौने।। पल में रूठें, पल में मानें।
Read Moreअभी-अभी बारिश हुई, अभी खिली है धूप। सबके मन को मोहता, चौमासे का रूप।। खेल रहे आकाश में, बादल अपना
Read Moreकरते-करते भजन, स्वार्थ छलने लगे। करते-करते यजन, हाथ जलने लगे।। झूमती घाटियों में, हवा बे-रहम, घूमती वादियों में, हया बे-शरम,
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