सबको सब कुछ ना मिला
सोच यही बस सब्र कर, मत कर मन संताप।सबको सब कुछ ना मिला, यही जगत का जाप।। अपनी-अपनी किस्मतें, अपने-अपने
Read Moreसोच यही बस सब्र कर, मत कर मन संताप।सबको सब कुछ ना मिला, यही जगत का जाप।। अपनी-अपनी किस्मतें, अपने-अपने
Read Moreधरती माता सह रही, मानव अत्याचार।पेड़ कटे तो घट रहा, जीवन का आधार।। बादल गरजे दूर से, बरसे मीठी धार।सूखी
Read Moreभीषण गर्मी के दिनों में जब सूर्य की तपिश धरती को झुलसाने लगती है, तब एक घूंट ठंडा पानी जीवन
Read Moreभक्ति की आँधी चली, डोला फिर इंसाफ।जेलों से भी लौटकर, मिलता वैभव-लाभ।। कल जिन पर आरोप थे, गूँजा था दरबार,आज
Read Moreपोता प्यारा दादा जी का,बैठे उनके पास।दिनभर उनसे बातें करता,हँसता बारह मास। दादा जी जब बाहर जाते,पीछे-पीछे जाता।छोटी-छोटी प्यारी बातें,सबको
Read Moreएक समय था जब भारतीय घरों, आँगनों, चौपालों और खेतों में लकड़ी की खाट जीवन का अभिन्न हिस्सा हुआ करती
Read Moreदेख सिकरी आगरा, ‘सौरभ’ है हैरान।खाली है दरबार सब, महल पड़े वीरान।। कल जिनके आदेश पर, झुकता था संसार,आज हवा
Read Moreभारत वर्ष 2027 में अपनी पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना कराने जा रहा है। यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि
Read Moreलिखने वाले बढ़ गए, घटते गए विचार।बिन पढ़े ही बन रहे, मंचों के सरदार।। दो पंक्ति फेसबुक लिखी, बन बैठे
Read Moreकॉकरोच कहकर जिन्हें, समझा था कमजोर।डिजिटल होते दौर में, वही बने सिरमौर॥ मीमों वाली चोट से, हिलने लगे विचार,हँसते-हँसते बोलते,
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