दाढ़ी पर नहीं, सोच पर बहस ज़रूरी
हर दौर की अपनी पहचान होती है। यह पहचान केवल कपड़ों, हेयर-स्टाइल या चेहरे पर उगे बालों से नहीं बनती,
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Read Moreसरकार जब भी आर्थिक अनुशासन, बजट संतुलन या खर्च घटाने की बात करती है, तो सबसे पहले निशाने पर सामाजिक
Read Moreइतिहास के कुछ क्षण ऐसे होते हैं जब सभ्यता अपने ही आईने में झाँकने से डरने लगती है। आज हम
Read Moreराजस्थान का थार मरुस्थल केवल रेत का विस्तार नहीं है, बल्कि यह एक जटिल और संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र है, जिसकी
Read Moreदेश की राजधानी दिल्ली को अक्सर सत्ता, सुरक्षा और आधुनिकता का प्रतीक बताया जाता है। ऊँची इमारतें, स्मार्ट सिटी के
Read Moreएक समय ऐसा भी था, जब मुझे बाल-पत्रिकाओं के अस्तित्व की कोई जानकारी नहीं थी। यह जानना तो दूर, मुझे
Read Moreअमेरिकी न्याय विभाग द्वारा सार्वजनिक की जा रही एपस्टीन फाइल्स केवल एक आपराधिक कांड का खुलासा नहीं हैं, बल्कि वे
Read Moreआज शिक्षा का अर्थ सीखना नहीं, बल्कि साबित करना हो गया है। साबित करना कि बच्चा बेहतर है, तेज़ है,
Read Moreबचपन का राग, हँसी की बहार,फूलों सी खुशबू, रंगों की बौछार।नन्हे कदमों की दुनिया बड़ी,सपनों की पगडंडी, हर पल नई।
Read More“ज्ञान बढ़ा पर भाव क्या, अब भी मन लाचार”—यह पंक्ति केवल एक दोहा नहीं, बल्कि इक्कीसवीं सदी के मनुष्य की
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