Author: *डॉ. सत्यवान सौरभ

बाल कविता

मंच पर मुस्कुराता बचपन

नन्हे-नन्हे बच्चे आए,मंच पे मिलकर मुस्कुराए।रंग-बिरंगी लाइट जली,खुशियों की फिर धुन चली। नीली ड्रेस में गुड़िया प्यारी,परी जैसी लगती न्यारी।छोटे-छोटे

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कविता

नन्हा दीपक

नन्हे-नन्हे हाथों में,जगमग करती ज्योति,मुस्काता सा चाँद लगे,उसकी प्यारी प्रीति। धीरे-धीरे कदम बढ़ाए,आँखों में उजियारा,छोटी-सी ये रोशनी भी,लगती कितना प्यारा।

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