नारी का अंतर्मन
जी करता है जाने तुझको,कैसी थी तुम बचपन में।चञ्चल थी या चुप चुप रहतीसच कह क्या अंतर्मन में। कितना मुश्किल
Read Moreजी करता है जाने तुझको,कैसी थी तुम बचपन में।चञ्चल थी या चुप चुप रहतीसच कह क्या अंतर्मन में। कितना मुश्किल
Read Moreचारुलता चञ्चल चितवनकजरारे से कमल नयनकाले केश घुँघरालेरमणी धारती पित वसन। किंकिनी बजती छन छननइठलाती चले नूपुर पहनहो जाते सब
Read Moreउपालंभ आलोचना, मत करिए सरकार।कविता पढ़कर आप सब, देते रहिए प्यार।। मेरे शब्दों की छाँव तलेकभी बैठ जरा क्षण दो
Read Moreराधा राधा भोर शामबरसाने आए श्यामचोरी चोरी चुप चुपराधा को बुलाए हैं। सखियों से बच करआई राधा छिप करभर पिचकारी
Read Moreपता है पापा चारो ओर यह शोर है कि आरंभ है पितृपक्ष।आप ना पापा आप!इन दिनों आएंगे हमारे समक्ष|रहेंगे हमारे
Read Moreहोली का नाम लेते ही सहसा बचपन वाली होली की ही याद आ ही जाती है। माँ, पापा हम सभी
Read Moreन जाने वह यह सबकर लेती थी कैसे?तंगी भरे दिनों में भीरख कंधे पर हाथनिकाल देती थी पैसे। देखता रहता
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