कविता

जब चंदा चमके आकाश में

विधा- कविता
शीर्षक- जब चंदा चमके आकाश में

जब चंदा चमके आकाश में,
तुम आना पिया मेरे पास में,
मन महकेगा, तन चहकेगा,
आनंद आएगा हमारी तलाश में।

चंदा पूछेगा अपनी चंदनिया से,
तुम नृत्य करोगी मेरे साथ?
चंदनिया भी मेरी तरह हर्षेगी,
लेकर हाथों में पिया का हाथ।

पुष्प महकाएंगे जग को पलाश के,
तारे भी हर्षित होंगे नाच-नाच के,
मन में हमारे उमंगें होंगी मिलन की,
रास रचाएंगे कदंब के पेड़ वृन्दावन के।

जाने कब उठ जाए सांसों का डेरा,
देख पाएं-न-पाएं निशा का सवेरा,
तुम आ जाना पिया मेरे पास में,
जब चंदा चमके नीलाभ आकाश में।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244