जब चंदा चमके आकाश में
विधा- कविता
शीर्षक- जब चंदा चमके आकाश में
जब चंदा चमके आकाश में,
तुम आना पिया मेरे पास में,
मन महकेगा, तन चहकेगा,
आनंद आएगा हमारी तलाश में।
चंदा पूछेगा अपनी चंदनिया से,
तुम नृत्य करोगी मेरे साथ?
चंदनिया भी मेरी तरह हर्षेगी,
लेकर हाथों में पिया का हाथ।
पुष्प महकाएंगे जग को पलाश के,
तारे भी हर्षित होंगे नाच-नाच के,
मन में हमारे उमंगें होंगी मिलन की,
रास रचाएंगे कदंब के पेड़ वृन्दावन के।
जाने कब उठ जाए सांसों का डेरा,
देख पाएं-न-पाएं निशा का सवेरा,
तुम आ जाना पिया मेरे पास में,
जब चंदा चमके नीलाभ आकाश में।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया
