कविता
बर्षा की फुहारो से पानी की झनकारो से हवा -भरी तुफानों से गरज-गरज कर घुमड़ रहे है रिमझिम – रिमझिम
Read Moreप्रीत मिलन की याद सतावे दे दो दर्शन प्यास बुझावे उनके बिन कुछ भी न भाता ए सखि साजन? ना
Read Moreप्रीत मिलन की आस लगी है कब आओगे – कब आओगे मधुर मिलन की आस लगी है कब आओगे कब
Read Moreकिस कदर चाँद तारों का आना हुआ, किस कदर कारवाँ का भी जाना हुआ, हम जमाने की कलियाँ , खिलाते
Read Moreवर्षा ऋतु आयी है सबका जी डराई है कहीं- कहीं सूखा का डर कही – कही है बाढ़ का भय
Read Moreवर्षा रानी तुझे बुलावा संसार मे आया है धरती सूखी, नदियाँ सूखी, नहरें सूखी आकाल है! जीवों का संसार है
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