पर्यावरण

वर्टिकल फॉरेस्ट : गगनचुंबी इमारतों में लहलहाते जंगल

प्रकृति सृष्टि रचना का आधार है। प्रकृति आनंद का उत्स है। प्रकृति दिव्यतम है, अन्यतम है। वह प्रीतिकर स्नेह रसागार है। प्रकृति जीवन-राग का मधुर आलाप है, आलंबन है। प्रकृति की परिधि से परे कुछ भी नहीं। प्रकृति रोग-शोक नाशक है। प्रकृति प्राण प्रदायिनी अधिष्ठात्री देवी है। प्रकृति का अस्तित्व न केवल मानव अपितु समस्त […]

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प्रकृति का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है

आज इस इक्कीसवीं सदी तक पहुँचते-पहुँचते हम शिक्षित तो खूब हुए पर हमने प्रकृति को ध्वंस करने में कोई कसर नहीं छोड़ी |कभी-कभी तो यूँ लगता है कि हमारी सारी प्रगति और उन्नति के मूल में यह विध्वंस ही छिपा है |हमने प्रकृति का सारा संतुलन बिगाड़ कर रख दिया है |जब कभी सुनामी या उत्तराखण्ड […]

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पशु क्रूरता कानून कितना न्याय संगत ?

सरकार द्वारा हिंसा को प्रोत्साहन अनुचित – आज राज्याश्रय के कारण हमारी संस्कृति जो मुगलों एवं अंग्रेजों के शासन काल में भी जितनी प्रभावित नहीं हुई उतनी स्वतंत्र भारत में नष्ट हो रही है। हमारी गलत नितियों के कारण आज हम ऐसी स्थिति में पहुँच गये है कि तनिक भी लापरवाही एवं उपेक्षावृत्ति से हमारा […]

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कुदरत की पीर, जोशीमठ की तस्वीर

जोशीमठ में उभरता संकट विकासात्मक परियोजनाओं की योजना बनाने और उन्हें क्रियान्वित करने के दौरान नाजुक हिमालयी पर्वतीय प्रणाली की विशेष और विशिष्ट विशेषताओं और विशिष्टताओं का सम्मान करने में विफलता की बात करता है। उत्तराखंड के इस शहर में 600 से अधिक घरों में कथित तौर पर दरारें आ गई हैं, जिससे कम से कम 3,000 लोगों की जान […]

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ताड़ी पेड़

ताड़ी का मुख्य मौसम दिसंबर से मई तक होता है। फरवरी से मार्च तक आने वाली ताड़ी को वांझिया ताड़ी तथा अप्रैल से मई तक मिलने वाली को फलनियां ताड़ी कहा जाता है। इसके अलावा अन्य महीनों में भी ताड़ी आती है, लेकिन उसमें वह बात नहीं होती। जून से अगस्त तक  स्वाद व सेहत […]

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घायल पक्षी की सहायता पक्षी सेवा के प्रति मानवीय दृष्टिकोण

आँवला नवमी के दिन सुबह मेरा पुत्र घूमने गया।रास्ते मे काबर पक्षी गिरा हुआ मिला शायद उसे बिजली के तारों से उसे करंट लगा हो या और कोई कारण रहा हो।काबर पक्षी अक्सर जोड़े में ही रहते है।उसी के समीप उसका साथी कलरव कर रहाथा।ऐसा लग रहा था वो उसे बचाने की गुहार कर रहा […]

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कहर बरपाता विदा होता मानसून

बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र और पश्चिमी विक्षोभ के कारण देश के कई राज्यों में इस समय भारी बारिश का दौर जारी है, जिससे अनेक स्थानों पर जनजीवन अस्त-व्यस्त है और विदा होता मानसून कुछ स्थानों पर तबाही भी मचा रहा है। मौसम विभाग का कहना है कि यह दौर […]

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जल ही जीवन है, जल का संचय करें

यह निर्विवाद सत्य है कि सभी जीवित प्राणियों की उत्पत्ति जल में हुई है. वैज्ञानिक अब पृथ्वी के अतिरिक्त अन्य ग्रहों पर पहले पानी की खोज को प्राथमिकता देते हैं. पानी के बिना जीवन जीवित ही नहीं रहेगा. इसी कारणवश अधिकांश संस्कृतियां नदी के पानी के किनारे विकसित हुई हैं … इस प्रकार जल ही […]

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गौवंश पर प्रकोप “लम्पि वायरस”

कोरोना त्रासदी के बादअब एक बार पुनः जनजीवन को प्रभावित करने वाला एक वायरस भारत के कई राज्यों में हाहाकार का कारण बना हुआ है। यह वायरस “लम्पि वायरस” के नाम से जाना जाता है और दुधारू पशुओं में संक्रमण व उनकी मृत्यु का कारण बन रहा है। खासकर गोवंश इससे बहुत अधिक प्रभावित है […]

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सावधान दक्ष, एक दिन बोलेंगे वृक्ष

मैं हूँ वृक्ष. मैं वनस्पतियों के प्रतिनिधि के रूप में अपने छोटे भाई मनुष्य के हितार्थ अपनी आत्मकथा लिख रहा हूँ, इसे उपकारों को गिनाना नहीं समझा जाए. वैसे भी हमने मनुष्य पर कोई उपकार नहीं किए हैं, प्रकृति माता ने हमें निमित्त बनाकर मनुष्य को उपहारों के अकूत भाण्डार दिए हैं, हमारी भूमिका तो […]