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चुनावों के बाद उत्तर प्रदेश में व्याप्त है जंगलराज

चुनावों की समाप्ति व परिणामों के बाद प्रदेश में वाकई जंगलराज स्थापित हो गया है। प्रदेश में महिलाओं व युवतियोें के साथ बलात्कार सहित जघन्य हत्याओं जैसी शर्मनाक वारदातों की बाढ़ सी आ गयी है। ऐसा प्रतीत ही नहीं हो रहा है कि उत्तर प्रदेश अब भगवान राम, कृष्ण व फिर संत कबीर व तुलसीदास जैसे महान संतों की धरती न होकर जघन्य बलात्कारियों की धरती बनकर रह गयी है। बदायूुं बरेली सहित प्रदेश के अन्य जिलों में वहशी दरिंदों ने जिस प्रकार से बेटियों के साथ दुराचार कर हत्या की है वह दिल दहला देने वाली है। बदायूं में पेड़ से लटकी मिली दो बहनों की लाशें अपने समाज की विकृति व देश की कानून व व्यवस्था से कुछ सवाल भी पूछ रहीं हैं।
जब दिल्ली मेें बस मेें एक मेडिकल छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार को अंजाम दिया गया था तब पूरी दिल्ली में जनाक्रोश उमड़ पड़ा था। आज प्रदेश की बेटियां कहीं पर भी सुरक्षित नहीं रह गयी हैं। कार्यालयों तथा सार्वजनिक स्थलों पर छेड़खानी की वारदातें भी आम हो गयी है। बदायूं, बरेली व अन्य जिलों की घटनाएं दिल दहला देने वाली हैं। आज हालात यह है कि पीडि़त परिवारों को राहत देने के नाम पर घटनाओं का राजनीतिकरण किया जा रहा है। बदायूं आज राजनैतिक दलों के नेताओं के लिए रेप पर्यटक स्थल बन गया है। एक समय था जब प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को प्रदेश की जनता ने युवा और ऊर्जावान नेता समझकर उनको सिर आंखों पर बैठाकर सत्ता सौपी थी। लेकिन अब यही जनता एक बार फिर उनके बारे में सोचने पर विचार कर रही है। चुनावों के बाद प्रदेश में अपराधों की बाढ़ है। युवतियां चीख रहीं हैं लेकिन उनकी चीखें और दर्द को सुनने वाला कोई नहीं अपितु उनके घावों पर गहरी राजनीति चमकायी जा रही है। अब हम अपने आपको कहते हैं कि विकास कर रहे हैं। लेकिन यह बड़े ही दुर्भाग्य की बात है कि आजादी के 60 वर्षों के अधिक समय बीत जाने के बाद भी गांवों में न तो पर्याप्त शिक्षा पहुंच सकी हैं और नहीं मूलभूत आवश्यक जनसुविधायें।
दूर दराज के गावों में ग्रामीण महिलाएं , बच्चियां खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हो रही हैं। गावों में बिजली भी नहीं रहती है। जिसके कारण दुराचारी प्रवृत्ति के लोग अंधेरे का लाभ भी उठा रहे हैं। जिस गांव में दुराचार के बाद बेंटियों को फांसी देकर पेड़ पर लटका दिया गया उस समय गांव में बिजली नहीं आ रही थी। उत्तर प्रदेश आईजी एसटीएफ आशीष गुप्ता का कहना है कि दुराचार की 65 प्रतिशत घटनाएं शौचालाय के अभाव मंे हो रही हैे।ष्शौच जाते समय ही दुराचार के मामले सामने आ रहे हैं। प्रदेश व दुराचार की घटनाओं से निपटने व आरोपियों को पर्याप्त सजा देने के लिए हर प्रकार के कानून हैं लेकिन हमारी कानूनी प्रक्रिया इतनी लचर व ढीली- ढाली है कि अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं। उन्हें यह अच्छी तरह पता है कि एक बार वारदात को अंजाम देने के बाद बचने के बहुत से रास्ते निकल सकते हैं।
विगत दिनों बागपत के छपरौली में छात्रा के साथ सामूहिक दुराचार,मुजफ्फरनगर के ककरौली , गाजियाबाद के मोदीनगर व बिजनौर के धामपुर में दुराचार की जघन्यतम वारदातें सामने आ चुकी हैं। सभी घटनायें एक से बढ़कर एक भयावह हैं जो समाज की रूढि़वादिता और दोहरे चरित्र को भी उजागर कर रही हैे। एक ओर हम और हमारा समाज महिला सशक्तीकरण की बात करता है तथा उनको आगे बढ़ानेे के लिए बैचेन हैं वहीं दूसरी ओर समाज का एक बहुत बड़ा वर्ग आज भी नारी ष्शरीर को एक उपभोक्ता वस्तु की तरह इस्तेमाल कर रहा है। जब तक हमारी न्यायिक व्यवस्था चुस्त- दुरूस्त नहीं होगी तब तक अपराधी बेखौफ घूमते रहेंगे। अब समय आ गया है कि महिलाओं व युवतियों का खोया हुआ सम्मान वापस दिलाने के लिये तथा पीडि़ताओं को न्याय दिलाने के लिए बिना किसी अदालती ट्रायल व जांच के केवल कुछ सबूतों के आधार पर ही दुराचारियों का सिर सऊदी अरब के कानून की तरह सिर को धड़ से अलग कर देना चाहिये।
उत्तर प्रदेश आज समाजवादियों तथा मानवाधिकारियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा हैं वहीं सपा मुखिया मुलायम सिंह ने चुनावों के दौरान बलात्कारियों को खुश करने के लिए जो बयान दिया था उसके बाद दुराचारियों के लिए यह प्रदेश उत्तम प्रदेश बन गया है। आज बदायूं ही नहीं अपितु पूरा पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित राजधानी लखनऊ दुराचारियों व छेड़खानी करने वाले लोगों के आतंक से कांप रहा है। लोग भयभीत हैं। अपनी बेटियों को शिक्षालय औरष्शौचालय भेजने में डरने लग गये हैं।
इन घटनाओं पर राजनीति व राजनेताओं का यह हाल है कि बदायूं में सपा सांसद धर्मेंद यादव पांच दिन बाद पीडि़त परिवार के पास पहुंचे। जबकि पीडि़त परिवार को अबउप्र सरकार व पुलिस पर से भरोसा ही उठ गया है। पीडि़त परिवार अब केंद्र सरकार से सुरक्षा की गुहार कर रहा है। मीडिया, इलेक्ट्रानिक मीडिया व सोशल मीडिया में उप्र की घटनायें छा जाने के बाद तथा जबर्दस्त राजनैतिक व सामाजिक दबाव बढ़ने के बाद प्रदेश सरकार कुछ सक्रिय होती दिखलाई दी है। प्रदेश मेें बढ़ रहे अपराध सपा सरकार के लिए राजनैतिक रूप से नासूर साबित हो रहे हेंैं सपा के समाजवाद का दिवाला निकल रहा है।
दूसरी ओर सपा में आतंरिक गुटबाजी व जंगलराज कायम हो गया है। चुनावी समीक्षा बैठकें हिंसक हो रही है। प्रदेश सरकार के मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति का कहना है कि सरकार ने युवकों को लैपटाप बांट, बेरोजगारी भत्ता दिया जिसका प्रचार तक नहीं किया गया। लाभार्थियों ने लैपटाप का प्रयोग दूसरे दलों के लिए किया। अब ऐसी योजनायें बंद करने पर विचार किया जा रहा है। दूसरी ओर सपा प्रवक्ता राजेन्द्र चैधरी अभी भी गहरे सदमंें में हैं। उन्हें समझ में नहीं आ रहा कि क्या किया जाये। वे अभी भी साम्प्रदायिक ताकतों की साजिश का रोना रो रहे हैंे। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से लेकर सपा का छोटा सा कार्यकर्ता तक बेसिर पैर के बयान दे रहा है। अब सपा का समाजवाद और बसपा का नारा दोराहे पर खड़ा होकर अपनी अंतिम सांसे गिन रहा है। कारण है कि दोनों ही दलों की जनता का शासन प्रदेश की जनता के लिए नरककुुंड साबित हो रहा है।

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