हास्य व्यंग्य

स्कूल के वो दिन ! सच मे बड़े याद आते हैं

स्कूल जाते हुए जब छोटे छोटे बच्चों को आज देखा तो याद आ गया की कैसे हम आर्यसमाज के स्कूल मे पढ़ने वाले विद्यार्थी खाकी फुल पैंट और सफ़ेद शर्ट मे पूरे आरएसएस के स्वयंसेवक लगते थे

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बारिश के समय तो स्कूल जाने का मज़ा ही अलग होता था , कंधे पर 16-17 किलो का बैग होता था (वैसे उसे बैग नहीं बोरी कहना ज्यादा उचित होगा )
जो मास्टर जी वर्गशिक्षक होते थे उनका सख्त निर्देश होता था की किसी विषय का अगर पीरियड न भी हो तब भी उस विषय की किताब और काँपी लानी ही है

न ले जाने पर 8-8 डंडे हाथों पर सेंक दिये जाते थे तो मार खाने के डर से हम लोग हर रोज अतिरिक्त 10 किलो वजन उठा कर स्कूल ले जाते थे

ये तो हुई बैग की बात बाद मे भक्ति मार्ग(ये एक रास्ते का नाम है ) जहां पर हमेशा बारिश के समय पानी भरता था वहाँ से स्कूल जाते समय तैराकी का अभ्यास भी हो जाता था , वैसे मुझे बारिश के लगातार 4 महीनों तक अभ्यास करते हुए भी आजतक ठीक से तैरना नहीं आया 

सातवीं तक तो स्कूल मे मैं कब समय पर पहुंचा था याद भी नहीं है तो स्कूल के बाहर प्राध्यापक जी आते थे और ईश्वर ने जो हमें मानव बनाया है उसे अपने दुस्साहस से हमारे शारीरिक ढाँचे को मुर्गे के रूप मे बदल देते थे !!

वैसे जिस विषय की कक्षा मे बैठने का मन नहीं करता था और जिस दिन वो पीरियड पहले हुआ करता था उस दिन तो हम लोग जरूर देरी से पहुँचते थे और 1 घंटे के लिए मुर्गा बन कर क्लास मे पड़ने वाली मार से बच जाते थे

सातवीं कक्षा के बाद स्कूल मे होने वाली प्रार्थना का दायित्व मुझे दे दिया गया !! ऊंची आवाज़ होने के कारण रोज प्रार्थना मैं ही करवाता था इसलिए प्रार्थना का दायित्व होने के कारण आठवीं कक्षा से मैं स्कूल चालू होने से आधा घंटा पहले ही पहुँच जाता था

कभी कभी तो बिजली न होने के कारण माइक मे नहीं तो सीधे विद्यालय के प्रांगण मे ही प्रार्थना बोलवा देते थे !! और गले की आवाज़ का कबाड़ा हो जाता था !!

यार वो भी क्या दिन थे जब हम स्कूल मे पढ़ते थे !!

खैर स्कूल मे चाहे जितनी भी मस्ती मैंने आजतक की है लेकिन मैंने अबतक जो कुछ भी “ज्ञान” सीखा है मेरे उसी आर्य समाज वाले हिन्दी माध्यम के स्कूल से सीखा है जिसका नाम था दयानन्द वैदिक विद्यालय बाकी सब जो बाद मे सीखा वो तो पेट भरने के लिए गधामजूरी करने वाली पढ़ाई थी

amitd079@gmail.com'

परिचय - अमित दुबे

भारत भूमि का एक हिन्दू हूँ देव,देश और धर्म के प्रति जागरूक हूँ इसलिए देश को क्षति पहुंचाने वाली किसी भी तरह की प्रतिकृया का सम्पूर्ण विरोधी हूँ और राष्ट्र की अस्मिता को आगे बढ़ाने वाली क्रियाओं का धूर समर्थक भी हूँ शायद इसी अल्हड़ पन के कारण कई मित्र समझ नहीं पाते की मेरी विचारधारा क्या है विचारधारा पूर्णतः हिन्दुत्व की है जिसे आजकल सांप्रदायिकता का नाम दे दिया गया है 🙂 सावरकर जी की रचनाओं का ,हिन्दी गानों का और शास्त्रीय संगीत का रसिक हूँ

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