पितृपक्ष

हुआ खत्म पितृपक्ष
अब नवरात्री आई है
कर पित्रों की पूजा
माता की बारी आई है

पितृपक्ष में खिला ब्राह्मणों को
सोचते कमाया पुण्य है
नवरात्री में सजाकर मंदिर
खिलाकर लंगर लोगों को
दिखाया अपना धर्म है

पर जो जीते जी माँ-बाप
की कर के अवहेलना
उन्हें दुत्कारते हैं
क्या सच में श्राद्ध कर
उन्हीं माँ-बाप का वो
आर्शिवाद वो पाते हैं

ज़रा सा संभल कर
पैरों पर खडे क्या हुए
वही अंगुली पकड़कर
चलने वाले बच्चे आज
माँ-बाप को आँख दिखा
उन्हें गलत बताते हैं
क्या तर्पण कर के
वही बच्चे उनकी आत्मा
को शांती पहुंचाते हैं

जो आदर न करते हैं
माँ का अपने घर में
कहां वो मंदिरों में
कर के आरती
पुण्य पाते हैं

न सफल होगी कभी
तुम्हारी यहा यह दान दक्षिणा
गर जीते जी तुमने
माँ-बाप का न
किया आदर है ।
प्रिया

परिचय - प्रिया वच्छानी

नाम - प्रिया वच्छानी पता - उल्हासनगर , मुंबई सम्प्रति - स्वतंत्र लेखन प्रकाशित पुस्तकें - अपनी-अपनी धरती , अपना-अपना आसमान , अपने-अपने सपने E mail - priyavachhani26@gmail.com