बसंत की आस

ऐ कोकिल! तू रूठ मत, पतझड़ का मौसम जाएगा;
बसंत में बगिया खिल जाएगी, नया सवेरा आएगा।

नयी-नयी कलियां आएंगी , शीतल-मंद-पवन होगा;
मनभावन-मेह के बाद फिर से, सुन्दर नील-गगन होगा।
तेरी मधुर आवाज से , पथिक मस्त हो जाएगा;
बसंत में बगिया खिल जाएगी, नया सवेरा आएगा।

रंग-बिरंगी तितलियां फिरेंगी, सुन्दर-रंगीन फूलों पर;
बालाएं नाचेंगी-गाएंगी , बगिया में सुन्दर झूलों पर।
उपवन में हरियाली होगी , मधुकर गीत गाएगा;
बसंत में बगिया खिल जाएगी, नया सवेरा आएगा।

सुन्दर , सरस , पीली सरसों लहराएगी खेतों में;
चहुंओर खुशहाली होगी, प्रेम उमड़ आएगा मन में।
जो सुख गई है डाली , उसका रंग हरा हो जाएगा;
बसंत में बगिया खिल जाएगी, नया सवेरा आएगा।

हर्ष-उल्लास, उमंग-तरंग फगुआ लाएगा नवीन;
होली की धूम में तन-मन, दोनों हो जाएगा रंगीन।
मयूर नाचेगा मस्ती में, बादल जब घिर-घिर आएगा;
बसंत में बगिया खिल जाएगी, नया सवेरा आएगा।

आमों में बौर लगेंगे , फैलेगी बगिया में सुगंध ;
दामन में खुशियां विविध लिए, आएगा सुन्दर बसंत।
झमझम-झमझम वर्षा होगी, तन पुलकित हो जाएगा;
बसंत में बगिया खिल जाएगी, नया सवेरा आएगा।

प्रकृति-सुंदरी बनकर नववधू, सोलह श्रृंगार करेगी;
सभी प्राणियों में मधुमास , अपना प्यार भरेगी।
ऋतुराज के आने से तू, पतझड़ का दर्द भूल जाएगा;
बसंत में बगिया खिल जाएगी, नया सवेरा आएगा।

ऐ कोकिल! तू रूठ मत, पतझड़ का मौसम जाएगा;
बसंत में बगिया खिल जाएगी, नया सवेरा आएगा।

परिचय - अनुराग कुमार

नाम- अनुराग कुमार
(नवोदित कवि)
सदस्य- भारतीय साहित्य उत्थान समिति
विधा- श्रृंगार, ओज आदि।
पद- राजस्व लेखपाल
शिक्षा- बी०एस-सी० (गणित)
जमतिथि-19/09/1994
पिता का नाम- श्री रामदास
साहित्यिक उपलब्धि- कई समाचार पत्रों व साहित्यिक पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित। संगम नवांकुर सम्मान, युवा साहित्य सम्मान, मानव जागरूकता सम्मान, मुंशी प्रेमचंद स्मृति सम्मान।
पता-
ग्राम-सिसवा, पोस्ट-खुटहा बाजार,
जिला- महाराजगंज
पिन- 273303
उत्तर प्रदेश
मो०न०-8004292135
Email: anuragkumar321@gmail.com