गजल

मुहब्बत में गले मिलती गमों से
धड़कती आज सबकी धड़कनों से

जहाँ सारे हुआ है नाम रोशन
बहे आँसू बहुत पर लोचनों से

रिझाया दर्शकों को फिल्म से जब
दिखे तू चाँदनी सी महफिलों से

नशे में डूब अपने को भुलाया
कभी फिर से न उड पाई परों से

हमेशा याद में बसती सभी के
सजाया शायरों ने जब सुरों से

सखा ये जाम तेरा हो गया है
मगर तू छूटती कैसे साँकलों से

हवाएँ गुनगुनायेगी तुझे जब
गूँजे मीना सदा इन बादलों से

डॉ मधु त्रिवेदी

परिचय - डॉ मधु त्रिवेदी

जन्म तिथि --25/05/1974 पद ---प्राचार्या शान्ति निकेतन काॅलेज आॅफ बिज़नेस मैनेजमेंट एण्ड कम्प्यूटर साइन्स आगरा email -madhuparashar2551974@gmail.com रूचि --लेखन कवितायें ,गजल , हाइकू 20 से अधिक प्रकाशित Reference Books --"टैगोर का विश्व बोध दर्शन नागार्जुन के काव्य साहित्य में प्रगतितत्व अन्य Text Books