दोहे

फैशन के इस दौर में, जली अनूठी आग
अधनंगा तन को लिये,बिटिया घूमे बाग !!

माँ को कहते माम अब,डैड बन गये बाप
अम्मा बापू क्या बुरा,खुदी बताओ आप !!

गंगाजल गंदा लगे, सभी पी रहे कोक
पूरब पर हाबी हुआ,पश्चिम वाला शौक !!

संस्कार नहीं याद अब,कैसे कैसे लोग
बहुत सताया बाप को,थोड़ा तू भी भोग !!

बेख़बर देहलवी
महासचिव
अखिल भारतीय साहित्य उत्थान परिषद्

परिचय - बेख़बर देहलवी

नाम-विनोद कुमार गुप्ता साहित्यिक नाम- बेख़बर देहलवी लेखन-गीत,गजल,कविता और सामाजिक लेख विधा-श्रंगार, वियोग, ओज उपलब्धि-गगन स्वर हिन्दी सम्मान 2014, पूरे भारत मे लगभग 300 कविताओं और लेख का प्रकाशन