पहेलियाँ

(1)

चीनी के बोरे को लूटे
धैर्य न थोड़ा इसका टूटे
काली, छोटी ये काटे यदि
आह-आह मुँह से तब फूटे

उत्तर – चींटी

 

(2)

उड़ती लेकिन नहीं ये चिड़िया
आफत की छोटी सी पुड़िया
गंद जानती बस फैलाना
भन्न-भन्न का गाये तराना

उत्तर – मक्खी

 

(3)

गिरगिट बोले अपना खाना
बच्चे जानें पकड़ उड़ाना
हरा-भरा ये कौन बताओ
काम कोई फिर करने जाना

उत्तर – टिड्डा

 

(4)

काला, मोटा उड़नखटोला
मस्ती करनेवाला गोला
रंग-बिरंगे रस ले जाता
नहीं समझना इसको भोला

उत्तर – भँवरा

 

(5)

लगे देखने में परी जैसी
रंगोंवाले पंख निराले
छुआ अगर तो रंग लुटाती
फूल इसे पाकर मतवाले

उत्तर – तितली

परिचय - कुमार गौरव अजीतेन्दु

शिक्षा - स्नातक, कार्यक्षेत्र - स्वतंत्र लेखन, साहित्य लिखने-पढने में रुचि, एक एकल हाइकु संकलन "मुक्त उड़ान", चार संयुक्त कविता संकलन "पावनी, त्रिसुगंधि, काव्यशाला व काव्यसुगंध" तथा एक संयुक्त लघुकथा संकलन "सृजन सागर" प्रकाशित, इसके अलावा नियमित रूप से विभिन्न प्रिंट और अंतरजाल पत्र-पत्रिकाओंपर रचनाओं का प्रकाशन